
श्री राधा संस्कृत उ.मा. विद्यालय कि स्थापना 1 जुलाई 1960 को आचार्य स्व. रामकृष्ण दीक्षित ने अपनी संस्कृतनिष्ठ पुत्री कु. राधा कि पुण्यतिथि में की। निरंतर और अथक प्रयास करने के बाद वर्ष 1964 में वाराणसेयसंस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से वर्ष 1963-64 में प्रथमा कक्षा तक स्थायी मान्यता एवं सन 1964-65 में पूर्व मध्यमा से उत्तर मध्यमा तक अस्थायी मान्यता प्राप्त हुई। वर्ष 1964-65 में ही उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुदान सूची में विद्यालय को सम्मिलित किया। अथक प्रयास के उपरांत विद्यालय का भवन 6.5 बिस्वा आबादी की भूमि पर ग्राम निगोहा में सभी ग्रामवासियो के सहयोग से निर्माण कार्य कराया गया।
विधिवत संस्थापक स्व . राम कृष्ण दीक्षित के संचालन में प्रबंधतंत्र का गठन हुआ। श्री दीक्षित 1 जुलाई 1960 से लेकर 1966 तक प्रधानाचार्य के रूप में निःशुल्क शैक्षणिक सेवाएं प्रदान की वर्ष 1981 में विद्यालय समिति ने सर्वसम्मति से विद्यालय का स्थनांतरण निगोहा से नानकरी कर दिया। विद्यालय का लक्ष्य संस्कृत शिक्षा का प्रचार प्रसार एवं सनातन धर्म की व्यवस्था को बनाये रखने हेतु लोगो को संस्कृत भाषा के प्रति जाग्रत करना है।
